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Pustakalaya Ka Mahatva Essay In Hindi Nibandh On Diwali

पुस्तकों का महत्व पर अनुच्छेद लेखन

 

संकेत बिंदु :

  • पुस्तक हमारी  सच्ची मित्र,
  • प्रेरणा की स्रोत, 
  • विकास की सूत्रधार,
  • प्रचारका साधन,
  • मनोरंजन  का साधन। 

पुस्तकें हमारी मित्र हैं। वे अपना अमृतकोष सदा हम पर न्यौछावर करने को तैयार रहती हैं। पुस्तकें प्रेरणा का भण्डार होती हैं। उन्हें पढ़कर जीवन में कुछ महान काम करने की प्रेरणा मिलती है। महात्मा गांधी को महान बनाने में गीता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मैथिलीशरण गुप्त की "भारत-भारती" पढ़कर कितने ही नौजवानों ने आज़ादी के आंदोलन में भाग लिया था। पुस्तकें ही आज की मानव सभ्यता के मूल में हैं। पुस्तकों के द्वारा एक पीढ़ी का ज्ञान दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते पहुँचते सारे युग में फ़ैल जाता है। पुस्तकें किसी भी विचार, संस्कार, या भावना के प्रचार का सबसे शक्तिशाली साधन है। तुलसीदास के "रामचरितमानस" ने तथा व्यास रचित "महाभारत" ने अपने युग को तथा आने वाली पूरी तरह प्रभावित किया। पुस्तकें मानव के मनोरंजन में भी परम सहायक सिद्ध होती हैं। मनुष्य अपने एकांत क्षण को पुस्तकों के साथ बिता सकता है। किसी ने कहा है - पुस्तक एक जाग्रत देवता है। उनसे तत्काल वरदान प्राप्त किया जा सकता हैं। 

पुस्तकालय पर अनुच्छेद यहाँ पढ़ें। 


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ज्ञान की देवी माता सरस्वती की उपासना के लिए दो मंदिर हैं- एक विद्यालय और दूसरा पुस्तकालय । विद्यालय में हम गुरु के चरणों में बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं और पुस्तकालय में बैठ कर मौन अध्ययन करते हैं ।

पुस्तकालय का अर्थ है- पुस्तक+आलय अर्थात पुस्तकें रखने का स्थान । पुस्तकालय कई प्रकार के होते हैं । स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में पुस्तकालय होते हैं । इनसे छात्र और अध्यापक दोनों लाभ उठाते हैं । दूसरे प्रकार के पुस्तकालय व्यक्तिगत होते हैं । कुछ स्थानों पर सरकारी पुस्तकालय भी होते हैं । पब्लिक पुस्तकालय भी होते हैं ।

पांचवे प्रकार के पुस्तकालय चल-पुस्तकालय होते हैं । इन पुस्तकालयों का स्थान विशेष बस या गाड़ी में होता है । सबसे बड़ा पुस्तकालय अमेरिका में है जिसमें चार करोड़ से अधिक पुस्तकें हैं । भारत में कलकत्ता में सबसे बड़ा पुस्तकालय है जिसमें दस लाख पुस्तकें हैं । पुस्तकालयों के अनेक लाभ हैं ।

सभी पुस्तकों को खरीदना हर किसी के लिए सम्भव नहीं है । इसके लिए लोग पुस्तकालय का सहारा लेते हैं । इन पुस्तकालयों से निर्धन व्यक्ति भी लाभ उठा सकता है । पुस्तकालय से हम अपनी रूचि के अनुसार पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं । वास्तव में आर्थिक उन्नति के साथ साथ बौद्धिक उन्नति का होना भी जरुरी है ।

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